UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी (गद्य खंड)

UP Board Solutions

UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी (गद्य खंड)

These Solutions are part of UP Board Solutions for Class 10 Hindi. Here we have given UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी (गद्य खंड).

जीवन-परिचय एवं कृतियाँ

प्रश्न 1.
जयप्रकाश भारती के जीवन-परिचय एवं साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालिए। [2009, 10]
या
जयप्रकाश भारती का जीवन-परिचय दीजिए और उनकी एक रचना का नामोल्लेख कीजिए। [2012, 13, 14, 15, 16, 17, 18]
उत्तर
पत्रकार एवं हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक श्री जयप्रकाश भारती ने साहित्यिक शैली में वैज्ञानिक लेख लिखने और साक्षरता प्रसार के कार्य में विशेष ख्याति प्राप्त की है। ये सफल निबन्धकार, कहानीकार एवं रिपोर्ताज लेखक हैं। गम्भीर विषय को भी रुचिकर और बोधगम्य बनाकर प्रस्तुत करने में आप सिद्धहस्त हैं।

जीवन-परिचय—श्री जयप्रकाश भारती का जन्म मेरठ नगर के मध्यमवर्गीय प्रतिष्ठित परिवार में 2 जनवरी, सन् 1936 ई० को हुआ था। इनके पिता श्री रघुनाथ सहाय मेरठ के प्रसिद्ध वकील, पुराने कांग्रेसी और समाज-सेवी व्यक्ति थे। इन्होंने मेरठ में अध्ययन कर बी० एस-सी० की परीक्षा उत्तीर्ण की और छात्र-जीवन से ही समाज-सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि के रूप में समाज-सेवा की। मेरठ में साक्षरता-प्रसार के लिए इन्होंने कई वर्षों तक प्रौढ़ रात्रि-पाठशाला का नि:शुल्क संचालन कर उल्लेखनीय कार्य किया। इन्होंने सम्पादन कला-विशारद’ की परीक्षा उत्तीर्ण करके मेरठ से प्रकाशित होने वाले दैनिक प्रभात’ और दिल्ली से प्रकाशित होने वाले ‘नवभारत टाइम्स’ में व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा ‘साक्षरता-निकेतन’ लखनऊ में नवसाक्षर साहित्य के लेखन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इन्होंने कई वर्षों तक दिल्ली से प्रकाशित होने वाले ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान में सह-सम्पादक के रूप में कार्य किया। तत्पश्चात् दिल्ली में हिन्दुस्तान टाइम्स द्वारा संचालित सुप्रसिद्ध बाल पत्रिका ‘नंदन’ के सम्पादक के रूप में कार्य करते रहे। दिनांक 5 फरवरी, 2005 को श्री भारती जी का देहावसान हो गया।

रचनाएँ-भारती जी की अनेक मौलिक एवं लगभग सौ सम्पादित पुस्तकें हैं। इनकी उल्लेखनीय रचनाएँ अग्रलिखित हैं

  1. मौलिक रचनाएँ-‘हिमालय की पुकार’, ‘अनन्त आकाश : अथाह सागर’ (ये दोनों पुस्तकें यूनेस्को द्वारा पुरस्कृत हैं); ‘विज्ञान की विभूतियाँ’, ‘देश हमारा’, ‘चलो चाँद पर चलें’ (ये तीनों पुस्तकें भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत हैं), ‘सरदार भगत सिंह’, ‘हमारे गौरव के प्रतीक’, ‘अस्त्र-शस्त्र’, ‘आदिम युग से अणु युग तक’, ‘उनका बचपन यूँ बीता’, ‘ऐसे थे हमारे बापू’ , “लोकमान्य तिलक’, ‘बर्फ की गुड़िया’, ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’, ‘भारत को संविधान’, ‘दुनिया रंग-बिरंगी’ आदि।
  2. सम्पादित रचनाएँ-‘भारत की प्रतिनिधि लोककथाएँ तथा किरणमाला’ (तीन भागों में) आदि।
  3. सम्पादन-कार्य–‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान में सह-सम्पादक एवं ‘नंदन’ (बाल-पत्रिका) के सम्पादक।
    साहित्य में स्थान-बालोपयोगी साहित्य के प्रणयन, वैज्ञानिक लेखों के साहित्यिक शैली में प्रस्तुतीकरण एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में जयप्रकाश भारती का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इन्होंने साहित्य में वैज्ञानिक लेखन के अभाव की पूर्ति कर हिन्दी-साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान बना लिया है।

गद्यांशों पर आधारित प्रश्न

प्रश्न-पत्र में केवल 3 प्रश्न (अ, ब, स) ही पूछे जाएँगे। अतिरिक्त प्रश्न अभ्यास एवं परीक्षोपयोगी दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होने के कारण दिए गये हैं।
प्रश्न 1.
दुनिया के सभी भागों में स्त्री-पुरुष और बच्चे रेडियो से कान सटाए बैठे थे, जिनके पास . टेलीविजन थे, वे उसके पर्दे पर आँखें गड़ाए थे। मानवता के सम्पूर्ण इतिहास की सर्वाधिक रोमांचक घटना के एक क्षण के वे भागीदार बन रहे थे – उत्सुकता और कुतूहल के कारण अपने अस्तित्व से बिल्कुल बेखबर हो गये थे। [2018]
(अ) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स) रोमांचक घटना के भागीदार कौन बन रहे थे?
[ दुनिया = विश्व। सटाए = मिलाकर। गड़ाए = एकटक देखना। भागीदार = हिस्सेदार। बेखबर = अनजान।]
उत्तर
(अ) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के गद्य-खण्ड में संकलित श्री जयप्रकाश भारती द्वारा लिखित ‘पानी में चंदा और चाँद पर आदमी’ नामक निबन्ध से अवतरित है। अथवा निम्नवत् लिखिए पाठ का नाम-पानी में चंदा और चाँद पर आदमी। लेखक का नाम-श्री जयप्रकाश भारती। [विशेष—इस पाठ के शेष सभी गद्यांशों के लिए यही उत्तर इसी रूप में लिखा जाएगा।] |

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक का कथन है कि सबसे अधिक रोमांचकारी घटना (मनुष्य का चाँद पर पहुँचना) को देखने और सुनने के लिए टी०वी० या रेडियो के पास बैठकर पूरी दुनिया के सभी व्यक्ति एक पल के लिए इसके हिस्सेदार बन रहे थे। जिज्ञासा और बेचैनी के कारण वे अपनी हस्ती से बिल्कुल अनजान हो गये थे।

(स) दुनिया के सभी भागों के स्त्री-पुरुष और बच्चे रोमांचक घटना के भागीदार बन रहे थे। ”

प्रश्न 2.
मानव को चन्द्रमा पर उतारने का यह सर्वप्रथम प्रयास होते हुए भी असाधारण रूप से सफल रहा। यद्यपि हर क्षण, हर पग पर खतरे थे। चन्द्रतल पर मानव के पाँव के निशान उसके द्वारा वैज्ञानिक तथा तकनीकी क्षेत्र में की गयी असाधारण प्रगति के प्रतीक हैं। जिस क्षण डगमग-डगमग करते मानव के पग उस धुलि-धूसरित अनछुई सतह पर पड़े तो मानो वह हजारों-लाखों साल से पालित-पोषित सैकड़ों अन्धविश्वासों तथा कपोल-कल्पनाओं पर पद-प्रहार ही हुआ। कवियों की कल्पना के सलोने चाँद को वैज्ञानिकों ने बदसूरत और जीवनहीन करार दे दिया-भला अब चन्द्रमुखी कहलाना किसे रुचिकर लगेगा। [2013]
(अ) प्रस्तुत गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए अथवा गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए।. .
(स)

  1. चन्द्रमुखी कहलाना क्यों रुचिकर नहीं लगेगा ?
  2. जिस समय मनुष्य के कदम चन्द्रमा पर पड़े, उस समय क्या हुआ ? या मानव के चन्द्रमा पर उतरने का क्या भाव प्रतिध्वनित हुआ ?
  3. मानव द्वारा चन्द्रमा पर उतरने का प्रयास कैसा रहा ?

[डगमग-डगमग करते हुए = लड़खड़ाते हुए। धूलि-धूसरित = धूल से सने हुए। अनछुई = जो किसी के द्वारा छुई हुई न हो। पालित-पोषित = पालन-पोषण किये गये। कपोल-कल्पना = झूठी कल्पना। पद-प्रहार = पैरों का आघात, (यहाँ पर) किसी धारणा को एकदम ही नकार देना। सलोने = सुन्दर। जीवनहीन = जीवों से रहित। करार देना = नाम देना। रुचिकर = अच्छा।]
उत्तर
(ब) प्रथम रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक श्री जयप्रकाश भारती जी कहते हैं कि चन्द्रमा पर उतरने के कई सफल प्रयास पहले भी किये जा चुके थे। लेकिन चन्द्रमा पर मनुष्य को उतारने का। यह प्रथम प्रयास था, जो कि अमेरिका के द्वारा किया गया था। यह प्रयास उम्मीद से अधिक सफल रहा। यद्यपि चन्द्रमा पर मनुष्य के रखे गये प्रत्येक कदम और बिताये गये प्रत्येक क्षण खतरे से भरे हुए थे, तथापि दोनों ही अन्तरिक्ष यात्री अपने तीसरे साथी के साथ पृथ्वी पर सकुशल वापस लौट आये।।

द्वितीय रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक श्री जयप्रकाश भारती जी कहते हैं कि जैसे ही अमेरिकी चन्द्रयान चन्द्रमा पर पहुंचा और मानव ने अपने लड़खड़ाते हुए कदम सफलतापूर्वक चन्द्रमा के धरातल पर रखे, वैसे ही प्राचीनकाल से आज तक के उसके बारे में चले आ रहे सारे अन्धविश्वास एवं निरर्थक अनुमान असत्य प्रमाणित हो गये। चन्द्रमा पर पहुँचने पर उसके विषय में यथार्थ सत्य सामने आ गया और सारी कल्पनाएँ झूठी सिद्ध हो गयीं। हमारे प्राचीन कवि चन्द्रमा को सुन्दर कहते थे और नारियों के सुन्दर मुख की तुलना चन्द्रमा से किया करते थे, लेकिन चन्द्रतल पर पहुँचकर वैज्ञानिकों ने कवियों की इन भ्रान्तियों को असत्य सिद्ध कर दिया। उन्होंने बताया कि चन्द्रमा बहुत कुरूप, ऊबड़-खाबड़ और जीवनहीन है। यदि कोई व्यक्ति किसी सुन्दरी को अब चन्द्रमुखी कहेगा तो अब वह अपने को चन्द्रमुखी (कुरूप और निर्जीव मुख वाली) कहलाना कैसे पसन्द करेगी ?
(स)

  1. अब किसी स्त्री को चन्द्रमुखी; चन्द्रमा के समान मुख वाली; कहलाना इसलिए रुचिकर नहीं लगेगा; क्योंकि चन्द्रमा पर उतरने के बाद वैज्ञानिकों ने इसे बदसूरत और जीवनहीन घोषित कर दिया।
  2. जिस समय मनुष्य के कदम चन्द्रमा पर पड़े उस समय लाखों वर्षों से चन्द्रमा के बारे में चले आ रहे अन्धविश्वास और निरर्थक अनुमान असत्य सिद्ध हो गये।
  3. मानव द्वारा चन्द्रतल पर उतरने का सर्वप्रथम प्रयास पूर्ण रूप से सफल रहा। यह मनुष्य की वैज्ञानिक-तकनीकी क्षेत्र में की गयी असाधारण प्रगति का प्रतीक था।

प्रश्न 3.
हमारे देश में ही नहीं, संसार की प्रत्येक जाति ने अपनी भाषा में चन्द्रमा के बारे में कहानियाँ गढ़ी हैं और कवियों ने कविताएँ रची हैं। किसी ने उसे रजनीपति माना तो किसी ने उसे रात्रि की देवी कहकर पुकारा। किसी विरहिणी ने उसे अपना दूत बनाया तो किसी ने उसके पीलेपन से क्षुब्ध होकर उसे बूढ़ा और बीमार ही समझ लिया। बालक श्रीराम चन्द्रमा को खिलौना समझकर उसके लिए मचलते हैं तो सूर के। श्रीकृष्ण भी उसके लिए हठ करते हैं। बालक को शान्त करने के लिए एक ही उपाय था; चन्द्रमा की छवि को । पानी में दिखा देना। [2009, 15, 17]
(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स)

  1. मचलते और हठ करते बालक को शान्त करने के लिए क्या उपाय था?
  2. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने क्या कहा है ?

[रजनीपति = रात्रि का स्वामी। विरहिणी = प्रिय अथवा पति से बिछड़ी हुई दुःखी स्त्री। क्षुब्ध = दु:खी।]
उत्तर
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक का कथन है कि निर्जीव चन्द्रमा को कभी रात्रि का पति तो कभी रात की देवी कहा गया। कभी किसी विरह-विधुरा नायिका ने उसे अपना दूत बनाकर उसके माध्यम से अपने प्रियतम के लिए सन्देश भेजा तो कभी उसका पीलापन देखकर उसे बूढ़ा, बीमार और दुर्बल समझ लिया गया।
(स)

  1. मचलते और हठ करते बालक को शान्त करने के लिए चन्द्रमा की छवि को पानी में दिखा दिया जाता था।
  2. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने कहा है कि चन्द्रमा से केवल भारत के ही नहीं, वरन् संसार की प्रत्येक जाति के लेखक और कवि प्रभावित रहे हैं और उसके विषय में कहानियाँ गढ़ते रहे हैं।
  3. मानव की प्रगति का चक्र कितना घूम गया है। इस लम्बी विकास-यात्रा को श्रीमती महादेवी वर्मा ने एक ही वाक्य में बाँध दिया है-“पहले पानी में चंदा को उतारा जाता था और आज चाँद पर मानव पहुँच गया है।”

प्रश्न 4.
मानव मन सदा से ही अज्ञात के रहस्यों को खोलने और जानने-समझने को उत्सुक रहा है। जहाँ तक वह नहीं पहुंच सकता था, वहाँ वह कल्पना के पंखों पर उड़कर पहुंचा। उसकी अनगढ़ और अविश्वसनीय कथाएँ उसे सत्य के निकट पहुँचाने में प्रेरणा-शक्ति का काम करती रहीं। अन्तरिक्ष युग का सूत्रपात 4 अक्टूबर, 1956 को हुआ था, जब सोवियत रूस ने अपना पहला स्पुतनिक छोड़ा। प्रथम अन्तरिक्ष यात्री बनने का गौरव यूरी गागरिन को प्राप्त हुआ। 2014, 161
(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स)

  1. मानव की विकास यात्रा को महादेवी जी ने कैसे स्पष्ट किया है ?
  2. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने मनुष्य की किस प्रवृत्ति को स्पष्ट किया है ?
  3. अन्तरिक्ष युग का सूत्रपात कब हुआ? [अनगढ़ = बेडौल।]

उत्तर
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक कहता है कि मनुष्य को मन प्राचीनकाल से ही नयी-नयी बातों को जानने के लिए उत्सुक रहा है। वह सदा अनजाने रहस्यों को सुलझाकर उन्हें जानने और समझने में अपनी शक्ति का उपयोग करता रहा है। जहाँ तक सम्भव हुआ, मानव ने अपनी कल्पना द्वारा उसे जानने की चेष्टा की। उसने अज्ञात रहस्यों के विषय में अनेक कल्पनाओं का निर्माण किया। चाहे उसे वे कल्पनाएँ सत्य से परे निराधार मालूम पड़ीं, लेकिन वह उन्हीं कल्पनाओं को साकार करने का प्रयास करता रहा और उनसे ही सत्य के निकट पहुँचने की प्रेरणा प्राप्त करता रहा।
(स)

  1. मानव की विकास-यात्रा को महादेवी जी ने एक वाक्य-“पहले पानी में चंदा को उतारा जाता था और आज मानव चाँद पर पहुँच गया है।”–में निबद्ध कर दिया है।
  2. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने अज्ञात रहस्यों को जानने की मनुष्य की प्रवृत्ति को स्पष्ट किया है तथा “यह भी कहा है कि मनुष्य की यही जिज्ञासा उसे प्रगति की ओर अग्रसर करती है।
  3. अन्तरिक्ष युग का सूत्रपात सोवियत रूस के द्वारा पहले स्पुतनिक को छोड़े जाने की तिथि 4 अक्टूबर, 1956 से हुआ।

प्रश्न 5.
अभी चन्द्रमा के लिए अनेक उड़ानें होंगी। दूसरे ग्रहों के लिए मानवरहित यान छोड़े जा रहे हैं। अन्तरिक्ष में परिक्रमा करने वाला स्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेजी से प्रयत्न किये जा रहे हैं। ऐसा स्टेशन बन जाने पर ब्रह्माण्ड के रहस्यों की पर्ते खोलने में काफी सहायता मिलेगी।
यह पृथ्वी मानव के लिए पालने के समान है। वह हमेशा-हमेशा के लिए इसकी परिधि में बँधा हुआ नहीं रह सकता। अज्ञात की खोज में वह कहाँ तक पहुँचेगा, कौन कह सकता है?
(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(स)

  1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक क्या कहना चाहता है ?
  2. लेखक ने चन्द्र-अन्तरिक्ष अभियानों के आगामी प्रयत्नों के बारे में क्या लिखा है ? वर्तमान समय में इसकी क्या स्थिति है ?

उतर
(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक कहता है कि व्यक्ति पालने में केवल अपना बचपन गुजारता है। जैसे-जैसे वह बचपन से किशोरावस्था की ओर अग्रसर होता है, वैसे-वैसे उसका पालने से मोहभंग होता जाता है और एक दिन वह पालने की परिधि से बाहर हो जाता है। यह पृथ्वी भी मनुष्य के लिए एक पालने के समान ही है और वह निरन्तर उसकी परिधि से बाहर जाने का प्रयत्न करता रहता है। अन्तरिक्ष अथवा अज्ञात की अनेक खोजें उसके इन्हीं प्रयत्नों का परिणाम हैं। इस अनन्त-असीम अन्तरिक्ष अथवा अन्य स्थानों में अज्ञात रहस्यों की खोज करता हुआ वह कहाँ तक पहुँचेगा, इसकी भविष्यवाणी करना असम्भव है।
(स)

  1. प्रस्तुत गद्यांश में लेखक द्वारा यह बात बड़े प्रभावशाली ढंग से बतायी गयी है कि वैज्ञानिक खोजों के लिए अनन्त क्षेत्र उपलब्ध है और मनुष्य जैसे-जैसे अपने ज्ञान-विज्ञान के द्वारा इस अनन्त का अन्त पाने का प्रयास करता है, वैसे-वैसे उस अनन्त का और अधिक विस्तार होता जाता है।
  2. सोमवार, 21 जुलाई, 1969 को सर्वप्रथम मानव ने चन्द्रमा पर अपने पैर रखे। लेखक ने चन्द्रमाअन्तरिक्ष अभियानों के आगामी प्रयत्नों के बारे में लिखा है कि “अभी चन्द्रमा के लिए और उड़ानें होंगी। दूसरे ग्रहों के लिए भी यान छोड़े जा रहे हैं। अन्तरिक्ष में स्टेशन स्थापित करने की दिशा में भी प्रयत्न किये जा रहे हैं। वर्तमान समय में लेखक द्वारा लिखे गये समस्त आगामी प्रयत्न वैज्ञानिकों द्वारा सफलतापूर्वक सम्पन्न किये जा चुके हैं।

व्याकरण एवं रचना-बोध ।

प्रश्न 1
निम्नलिखित शब्दों में सविग्रह समास-नाम बताइए-
चन्द्रतल, त्रिपाद, मरणोपरान्त, चन्द्रमुखी, रजनीपति, प्राणोदक, प्रयोगशाला।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी (गद्य खंड) 1

प्रश्न 2
निम्नलिखित शब्दों में प्रत्यय लगाकर नये शब्द बनाइए-
अस्ति, स्थापना, दुर्घटना, काल, प्रक्षेपण, स्थगन।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी (गद्य खंड) 2

प्रश्न 3
निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग पृथक् करके लिखिए-
बदसूरत, दुस्साहस, प्रघात, अनुसन्धान, प्रयोग, विशेष।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी (गद्य खंड) 3

प्रश्न 4
निम्नलिखित शब्दों में नियम-निर्देशपूर्वक सन्धि-विच्छेद कीजिए-
सर्वाधिक, मरणोपरान्त, दुस्साहस, पूर्वाभिनय, शयनागार, प्राणोदक।
उत्तर
UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी (गद्य खंड) 4

We hope the UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी (गद्य खंड) help you. If you have any query regarding UP Board Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7 पानी में चंदा और चाँद पर आदमी (गद्य खंड), drop a comment below and we will get back to you at the earliest.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

English Speaking CourseDownload App
+